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बॉन्ड फ्यूचर्स

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Bazaar Agle Hafte: सोमवार के शेयर बाजार पर जानिए Anil Singhvi की दमदार Strategy

सोमवार को डाओ फ्यूचर्स और कच्चे तेल की कीमतों से मिलेंगे अहम संकेत. डॉलर इंडेक्स, बॉन्ड यील्ड पर रखनी होगी नजर. Nifty 17,650 से 17,725 के बीच सपोर्ट करेगा और ऊपरी स्तरों पर 17,875 से 17,975 तक जाने की कोशिश करेगा. Bank Nifty 40,650 से 40,800 के बीच सपोर्ट करेगा और ऊपरी स्तरों पर 41,300 से 41,500 के बीच रुकावट करेगा. अगले हफ्ते से बाजार पर रिजल्ट सीजन का दिखेगा एक्शन: अनिल सिंघवी

ग्लोबल संकेत मिलेजुले, एशिया में मजबूती लेकिन SGX निफ्टी ने सारी बढ़त गंवाई

ग्लोबल बाजारों से अच्छे बॉन्ड फ्यूचर्स बॉन्ड फ्यूचर्स संकेत मिल रहे है। एशिया में रौनक है और SGX निफ्टी में बढ़त देखने को मिला। डाओ फ्यूचर्स में 200 प्वाइंट से ज्यादा की तेजी देखने को मिल रही है

10 साल के US बॉन्ड की यील्ड 3.2% पर है जबकि 2 साल के US बॉन्ड की यील्ड में गिरावट आई है। इधर US डॉलर इंडेक्स 109 के पार बरकरार है ।

ग्लोबल बाजारों से अच्छे संकेत मिल रहे है। एशिया में रौनक है और SGX निफ्टी में बढ़त देखने को मिला। डाओ फ्यूचर्स में 200 प्वाइंट से ज्यादा की तेजी देखने को मिल रही है। कल लेबर डे के मौके पर अमेरिकी बाजारों में छुट्टी थी। US फ्यूचर्स में तेजी देखने को मिली। 10 साल के US बॉन्ड की यील्ड 3.2% पर है जबकि 2 साल के US बॉन्ड की यील्ड में गिरावट आई है। इधर US डॉलर इंडेक्स 109 के पार बरकरार है ।

इस बीच कच्चे तेल में तेजी का रुख कायम है। OPEC PLUS देशों के अक्टूबर से प्रोडक्शन एक लाख बैरल प्रति दिन घटाने के फैसले का असर देखने को मिल रहा है।OPEC+ देश अक्टूबर से उत्पादन में कटौती करेंगे। रोजाना 1 लाख बैरल तेल उत्पादन में कमी करेंगे। OPEC+ की अगली बैठक 5 अक्टूबर को होगी। इधर BRENT क्रूड 1.5 फीसदी बढ़कर $95 प्रति बैरल के करीब पहुंचा है जबकि NYMEX क्रूड 1.4% बढ़कर $89 प्रति बैरल के करीब नजर आ रहा है।

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वहीं दूसरी तरफ कच्चे तेल पर राजनीति शुरु हो गई है। रूसी तेल कीमतों पर लगाम की कोशिश की जा रही है। रूस से सप्लाई रुकने से गैस के भाव 30 फीसदी बढ़े है। उधर रूसी क्रूड की कीमत पर कैप लगाने के G7 देशों के प्रस्ताव पर भारत ने कोई साफ जवाब नहीं दिया है। भारत जी 7 देशों के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। नैतिकता के आधार रूस का भारत बहिष्कार नहीं करेगा। भारतीय पेट्रोलियम मंत्री ने अपने बयान में कहा है कि अपने कंज्यूमर का ख्याल रखना हमारी नैतिकता है। भारत में प्रतिदिन 50 लाख बैरल तेल की खपत होती है। भारत के कुल तेल आयात का केवल 0.2 फीसदी रूस से आता है।

इस बीच आज एशियाई बाजारों में मिलाजुला कारोबार देखने को मिल रहा है। SGX NIFTY 28.00 अंक की बढ़त दिखा रहा है। वहीं, निक्केई करीब 0.02 फीसदी की बढ़त के साथ 27,624.96 के आसपास दिख रहा है। वहीं, स्ट्रेट टाइम्स में 0.19 फीसदी की बढ़त दिखा रहा है। ताइवान का बाजार 0.17 फीसदी चढ़कर 14,685.79 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। जबकि हैंगसेंग 0.05 फीसदी की गिरावट के साथ 19,216.19 के स्तर पर नजर आ रहा है। वहीं, कोस्पी में 0.12 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार हो रहा है। वहीं शंघाई कम्पोजिट 0.67 फीसदी की बढ़त के साथ 3,221.21 के स्तर पर दिख रहा है।

रुपये और बॉन्ड में आई उछाल

रुपये व सरकारी बॉन्ड में गुरुवार को मजबूती दर्ज हुई क्योंकि अमेरिका में कमजोर आर्थिक आंकड़ों ने इस कयास को बल दिया कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी कर सकता है। डीलरों ने यह जानकारी दी।

देसी मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 82.50 पर टिकी, जो मंगलवार को 82.73 पर रही थी। 10 वर्षीय बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड का प्रतिफल 3 आधार अंक घटकर 7.41 फीसदी पर बंद हुआ। बॉन्ड की कीमतें व प्रतिफल एक दूसरे के विपरीत दिशा में चलते हैं। बॉन्ड व मुद्रा बाजार बुधवार को बंद रहे।

मंगलवार को अमेरिका में जारी आंकड़ों से पता चला कि हाउसिंग की कीमतें अगस्त में उम्मीद से ज्यादा घटीं, वहीं एक अन्य रिपोर्ट बताती बॉन्ड फ्यूचर्स है कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में उपभोक्ताओं का भरोसा कम हो रहा है।

ऐसे आंकड़ों के बाद उम्मीद की जा रही है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी की रफ्तार थोड़ा धीमा कर देगा क्योंकि साल 2022 में अब तक काफी मौद्रिक सख्ती देखने को मिली है। ऐसे में अमेरिकी बॉन्ड का प्रतिफल घटा, वहीं डॉलर इंडेक्स में भी काफी कमजोरी आई। गुरुवार को 3.30 बजे अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 110.09 पर रहा, जो मंगलवार को 112.02 पर रहा था।

साल 2022 में अब तक फेड महंगाई घटाने के लिए ब्याज दरों में 300 आधार अंकों का इजाफा कर चुका है क्योंकि कई माह से महंगाई वहां 40 साल के उच्चस्तर पर टिकी हुई है। अमेरिका में ब्याज बढ़ोतरी से डॉलर की ताकत बढञी, अमेरिकी बॉन्ड के प्रतिफल में इजाफा हुआ और इसके परिणामस्वरूप भारत बॉन्ड फ्यूचर्स समेत अन्य उभरते बाजारों की परिसंपत्तियों को लेकर अपील कम हो गई।

नवंबर में होने वाली बैठक में फेड ब्याज दरों में 75 आधार अंकों का इजाफा कर सकता है, लेकिन फेड फंड फ्यूचर्स के ट्रेडरों को अब उम्मीद है कि दिसंबर में इतनी की बढ़ोतरी की संभावना काफी कम होगी।

साल 2022 में अब तक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 10 फीसदी कमजोर हुआ है। इस बीच, आरबीआई का विदेशी मुद्रा भंडार फरवरी में यूक्रेन युद्ध‍ शुरू होने के बाद से 100 अरतब डॉलर से ज्यादा घटा है।

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के ट्रेजरी प्रमुख अनिल कुमार भंसाली ने कहा, फेडरल रिजर्व की तरफ से रुख में बदलाव के संकेत मिलने तक डॉलर-रुपया में गिरावट पर बोली लगने की संभावना है। शुक्रवार को रुपया 82 से 82.60 के दायरे में रह सकता है क्योंकि निर्यातकों व आयातकों को अपनी प्राप्तियों व भुगतान को लेकर हेजिंग का मौका मिलेगा।

गुरुवार के कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपया 82.12 की ऊंचाई तक मजबूत हुआ था, लेकिन बाद में कुछ बढ़त गंवा दी, जिसकी वजह माह के आखिर में आयातकों खास तौर से तेल कंपनियों की डॉलर मांग रही।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, डॉलर की बिकवाली से रुपये में बुधवार के अवकाश के बाद खासी तेजी आई। हालांकि मजबूत शुरुआत के बाद माह के आखिर के लिए डॉलर की मांग व कमजोर देसी इक्विटी का स्थानीय मुद्रा पर असर पड़ा।

उन्होंने कहा, अल्पावधि में हाजिर डॉलर-रुपये को 82 फीसदी पर मजबूत समर्थन है और इसका प्रतिरोध स्तर 82.70 है। यह सीमित दायरे में कारोबार करेगा। 81.90 के नीचे जाने पर ही इस रुख में बदलाव की पुष्टि होगी।

अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में तेज गिरावट के अलावा देसी सरकारी बॉन्ड को इस हफ्ते केंद्र सरकार की तरफ से ताजा आपूर्ति के अभाव का फायदा मिला। डीलरों ने ये बातें कही।

रुपये और बॉन्ड में आई उछाल

रुपये व सरकारी बॉन्ड में गुरुवार को मजबूती दर्ज हुई क्योंकि अमेरिका में कमजोर आर्थिक आंकड़ों ने इस कयास को बल दिया कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी कर सकता है। डीलरों ने यह जानकारी दी।

देसी मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 82.50 पर टिकी, जो मंगलवार को 82.73 पर रही थी। 10 वर्षीय बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड का प्रतिफल 3 आधार अंक घटकर 7.41 फीसदी पर बंद हुआ। बॉन्ड की कीमतें व प्रतिफल एक दूसरे के विपरीत दिशा में चलते हैं। बॉन्ड व मुद्रा बाजार बुधवार को बंद रहे।

मंगलवार को अमेरिका में जारी आंकड़ों से पता चला कि हाउसिंग की कीमतें अगस्त में उम्मीद से ज्यादा घटीं, वहीं एक अन्य रिपोर्ट बताती है कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में उपभोक्ताओं का भरोसा कम हो रहा है।

ऐसे आंकड़ों के बाद उम्मीद की जा रही है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी की रफ्तार थोड़ा धीमा कर देगा क्योंकि साल 2022 में अब तक काफी मौद्रिक सख्ती देखने को मिली है। ऐसे में अमेरिकी बॉन्ड का प्रतिफल घटा, वहीं डॉलर इंडेक्स में भी काफी कमजोरी आई। गुरुवार को 3.30 बजे अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 110.09 पर रहा, जो मंगलवार को 112.02 पर रहा था।

साल 2022 में अब तक फेड महंगाई घटाने के लिए ब्याज दरों में 300 आधार अंकों का इजाफा कर चुका है क्योंकि कई माह से महंगाई वहां 40 साल के उच्चस्तर पर टिकी हुई है। अमेरिका में ब्याज बढ़ोतरी से डॉलर की ताकत बढञी, अमेरिकी बॉन्ड के प्रतिफल में इजाफा हुआ और इसके परिणामस्वरूप भारत समेत अन्य उभरते बाजारों की परिसंपत्तियों को लेकर अपील कम हो गई।

नवंबर में होने वाली बैठक में फेड ब्याज दरों में 75 आधार अंकों का इजाफा कर सकता है, लेकिन फेड फंड फ्यूचर्स के ट्रेडरों को अब उम्मीद है कि दिसंबर में इतनी की बढ़ोतरी की संभावना काफी कम होगी।

साल 2022 में अब तक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 10 फीसदी कमजोर हुआ है। इस बीच, आरबीआई का विदेशी मुद्रा भंडार फरवरी में यूक्रेन युद्ध‍ शुरू होने बॉन्ड फ्यूचर्स के बाद से 100 अरतब डॉलर से ज्यादा घटा है।

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के ट्रेजरी प्रमुख अनिल कुमार भंसाली ने कहा, फेडरल रिजर्व की तरफ से रुख में बदलाव के संकेत मिलने तक डॉलर-रुपया में गिरावट पर बोली लगने की संभावना है। शुक्रवार को रुपया 82 से 82.60 के दायरे में रह सकता है क्योंकि निर्यातकों व आयातकों को अपनी प्राप्तियों व भुगतान को लेकर हेजिंग का मौका मिलेगा।

गुरुवार के कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपया 82.12 की ऊंचाई तक मजबूत हुआ था, लेकिन बाद में कुछ बढ़त गंवा दी, जिसकी वजह माह के आखिर में आयातकों खास तौर से तेल कंपनियों की डॉलर मांग रही।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, डॉलर की बिकवाली से रुपये में बुधवार के अवकाश के बाद खासी तेजी आई। हालांकि मजबूत शुरुआत के बाद माह के आखिर के लिए डॉलर की मांग व कमजोर देसी इक्विटी का स्थानीय मुद्रा पर असर पड़ा।

उन्होंने कहा, अल्पावधि में हाजिर डॉलर-रुपये को 82 फीसदी पर मजबूत समर्थन है और इसका प्रतिरोध स्तर 82.70 है। यह सीमित दायरे में कारोबार करेगा। 81.90 के नीचे जाने पर ही इस रुख में बदलाव की पुष्टि होगी।

अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में तेज गिरावट के अलावा देसी सरकारी बॉन्ड को इस हफ्ते केंद्र सरकार की तरफ से ताजा आपूर्ति के अभाव का फायदा मिला। डीलरों ने ये बातें कही।

सोना वायदा(गोल्ड फ्यूचर्स) में निवेश करने से पहले जानने योग्य बातें

gold and graph

वायदा अनुबंध भविष्य की तारीख पर एक सहमत मूल्य पर किसी वस्तु को खरीदने या बेचने के लिए एक कानूनी समझौता होता है। मान्यता प्राप्त वायदा अनुबंध मानकीकृत होते हैं और वस्तुओं या वित्तीय साधनों के लिए हो सकते हैं। सोना उन वस्तुओं में बॉन्ड फ्यूचर्स से है, जिनका एक्सचेंज-ट्रेडेड, औपचारिक समझौतों के रूप में वायदा अनुबंधों के माध्यम से कारोबार किया जाता है।

सदियों से सोना सिक्कों, बार और आभूषणों के रूप में खरीदा और बेचा जाता रहा है। पिछले कुछ वर्षों में, सोने का कारोबार गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड, गोल्ड बॉन्ड, डिजिटल गोल्ड जैसे रूपों में होने लगा है। वायदा बाजार में काम करने वाले निवेशक मोटे तौर पर सट्टेबाज या हेजर्स होते हैं। सट्टेबाज बाजार का जोखिम लाभ कमाने की उम्मीद से लेते हैं, जबकि हेजर्स मूल्य गिरने के जोखिम का प्रबंधन करने के लिए वायदा अनुबंधों में निवेश करते हैं। उद्देश्य चाहे जो हो, वायदा कारोबार केवल वित्तीय और कमोडिटी बाजार के अच्छे ज्ञान वाले निवेशकों द्वारा ही कुशलतापूर्वक किया जा सकता है। यह ज्ञान न केवल उन्हें बाजार जोखिम का प्रबंधन करने में मदद करता है बल्कि वायदा अनुबंध की लागत और बॉन्ड फ्यूचर्स विशेषताओं को भी समझने में सहायक होता है।

भारत में सोने के वायदा कारोबार के विभिन्न पहलू

भारत में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के माध्यम से सोने का वायदा कारोबार किया जा सकता है। सोने का वायदा कारोबार सोने को भौतिक रूप से लिए बिना सोने में निवेश करना है। सोने के वायदा कारोबार के निवेशकों का उद्देश्य सोना लेना या उसमें निवेश करना नहीं होता। वे अपने जोखिमों को हेज करने के लिए सोने की कीमत में उतार-चढ़ाव को एक माध्यम के रूप बॉन्ड फ्यूचर्स बॉन्ड फ्यूचर्स में इस्तेमाल करते हैं।

सोने के वायदा कारोबार के प्रकार: MCX में सोने का वायदा कारोबार कई आकार के लॉट में होता है। लॉट का आकार आपके लेन-देन की कीमत तय करता है। 1 किलो लॉट आकार के सोने के अलावा, गोल्ड मिनी, गोल्ड पेटल और गोल्ड ग़िनीया अनुबंध हैं जो भारत में वायदा कारोबार में आ सकते हैं। मिनी अनुबंध 100 ग्राम का, गिनीया अनुबंध 8 ग्राम का और पेटल अनुबंध 1 ग्राम सोने का होता है। हालांकि, 1 किलो सोने का ट्रेड लोकप्रिय है, इसलिए यह सबसे ज्यादा लिक्विड है।

सोने के वायदा कारोबार का अनुबंध: सोने का वायदा कारोबार MCX में उपलब्ध है जो कॉन्ट्रैक्ट लॉन्च कैलेंडर के अनुसार होता है। वर्तमान में MCX गोल्ड अनुबंध हर दूसरे महीने लॉन्च होता है जिसकी एक्सपायरी 12 महीने की होती है। अनुबंध लॉन्च के महीने की 16 तारीख को शुरु होती है और इसमें एक्सपायरी वाले महीने की 5 तारीख तक कारोबार किया जा सकता है। सोने की बोली 10 ग्राम के लिए लगाई जाती है, जहां ट्रेडिंग इकाई 1 किलो है, और अधिकतम ऑर्डर आकार 10 किलो हो सकता है।

निपटान(सेटलमेंट) प्रक्रिया: सोने के वायदा कारोबार के अनुबंध में, अनुबंध का निपटान हर महीने की 5 तारीख को किया जाता है। आप या तो अनुबंध का निपटान कर सकते हैं (सोने की डिलीवरी ले सकते हैं) या महीने की 1 तारीख के पहले अपनी स्थिति को स्क्वायर ऑफ कर सकते हैं। यदि आप अनुबंध को निपटाने का विकल्प चुनते हैं तो यह 995 शुद्धता के साथ नंबर किए गए सोने के बार के रूप में होगा।

मार्जिन: हालांकि वास्तविक मार्जिन में उतार-चढ़ाव हो सकता है, फरवरी 2022 के सोने के अनुबंध में शुरुआती मार्जिन 6% या स्पैन मार्जिन में से जो भी अधिक हो, पर सेट किया गया था। इसका मतलब है कि यदि आपके पास वायदा अनुबंध में 1 लाख रुपए की स्थिति है, तो मार्जिन भुगतान 6,000 रुपए का होगा। मात्र 6,000 रुपए का भुगतान करके 1 लाख रुपए के एक्सपोजर का मतलब अधिक लाभप्रदता की संभावना है। यदि आप अनुबंध का निपटान करते हैं, तो आपको लागू होने वाले करों सहित अंतर्निहित सोने की पूरी कीमत चुकानी होगी।

भौतिक सोना: MCX में सोने के वायदा कारोबार में भौतिक रूप से सोने को लंदन बुलियन मर्चेंट एसोसिएशन-प्रमाणित रिफाइनरियों द्वारा शुद्धता के लिए प्रमाणित किया जाता है। MMTC-PAMP भारत में ऐसी ही एक LMBA प्रमाणित रिफाइनरी है। सिक्कों सहित सोने को MCX के क्लियरिंग कॉरपोरेशन के COMRIS सिस्टम में इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में रखा जा सकता है। डिलीवर किए गए या रखे गए सोने का एक व्यक्तिगत परख प्रमाणपत्र और एक उल्लिखित मेकिंग चार्ज होता है। इस तरह से इलेक्ट्रॉनिक रूप से रखे गए सोने का कारोबार और लिक्विडेशन आसानी से किया जा सकता है।

एक उदाहरण के माध्यम से वायदा अनुबंधों को समझना:

  • मान लीजिए कि आप अभी सोने के वायदा अनुबंध में प्रवेश करते हैं। यदि सोने का आखिरी कारोबार मूल्य रु. 50,000 प्रति 10 ग्राम था तो 1 मिनी लॉट के लिए आपके अनुबंध की कीमत रु 50 लाख बॉन्ड फ्यूचर्स होगी।
  • MCX टिक आकार या न्यूनतम मूल्य 1 रुपए/ प्रति ग्राम है। तो, इस अनुबंध में, आपको प्रत्येक रुपए में वृद्धि या कमी के साथ 100 रुपये का लाभ या हानि होगी। इस अनुबंध से आपको यही लाभ या हानि होगी।

सोने के वायदा कारोबार में ट्रेड करने की क्या प्रक्रिया है?

  1. सबसे पहले, आपको MCX में पंजीकृत ब्रोकर के साथ कमोडिटी ट्रेडिंग अकाउंट खोलना होगा। अकाउंट खोलने के लिए एक फॉर्म भरने और बुनियादी KYC दस्तावेज जैसे पहचान और निवास का प्रमाण, पासपोर्ट साइज फोटो, बैंक विवरण आदि प्रस्तुत करने की आवश्यकता होती है।
  2. आपका अकाउंट खुल जाने के बाद, आपको मार्जिन मनी को ब्रोकर के पास एक मार्जिन अकाउंट में जमा करना होगा। सोने के वायदा कारोबार के अनुबंध दस्तावेज में आपको मार्जिन दर मिल जाएगी। यदि ट्रेडिंग में घाटे के कारण आपकी प्रारंभिक मार्जिन राशि बॉन्ड फ्यूचर्स कम हो जाती है, तो आपको एक रखरखाव मार्जिन राशि जमा करना होगा। यह वह राशि है जिसका भुगतान करना प्रारंभिक मार्जिन को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

इस राशि को जमा करने के बाद आप लॉग इन कर सकते हैं और सोमवार से शुक्रवार तक सोने के वायदा कारोबार में सुबह 9 बजे से रात के 11:30 बजे के बीच ट्रेड कर सकते हैं।

सोने के वायदा निवेशक को सोने के निवेश, उस पर अर्थव्यवस्था के प्रभाव और सोने के ट्रेडिंग की अच्छी समझ होनी चाहिए। चूंकि वायदा अनुबंध में जोखिम के साथ-साथ लाभ भी काफी अधिक होता है, इसलिए उपरोक्त पहलुओं की गहन समझ की अत्यधिक अनुशंसा की जाती है।

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