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प्रकार के व्यापारियों

प्रकार के व्यापारियों
१. कुम्हार,
२. रेशम बुनने वाला,
३. सोनार (सुवर्णकार),
४. रसोइया (सूवकार),
५. गायक (गन्धब्ब),
६. नाई (कासवग),
७. मालाकार,
८. कच्छकार (काछी),
९. तमोली,
१०. मोची (चम्मपरु),
११. तेली (जन्तपीलग),
१२. अंगोछे बेचने वाले (गंछी),
१३. कपड़ा छापने वाले (छिम्प),
१४. ठठेरे (केंसकार),
१५. दर्जी (सीवग),
१६. ग्वाले (गुआर),
१७. शिकारी (भिल्ल) तथा
१८. मछुये।

व्यापारी दिवस एवं सम्मान समारोह का आयोजन

BOL PANIPAT : आज दिनांक 9 अगस्त 2021 को अग्रवाल भवन सेक्टर 24 में हरियाणा व्यापार मंडल के पूर्व चेयरमैन स्वर्गीय रोशन लाल गुप्ता के पावन स्मृति में हरियाणा व्यापार मंडल के तत्वाधान में व्यापारी दिवस एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता पुरुषोत्तम शर्मा ने की कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजीव जैन राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष भारतीय उद्योग व्यापार मंडल एवं रामनिवास गर्ग चेयरमैन व्यापारी कल्याण बोर्ड हरियाणा सरकार रहे.कार्यक्रम प्रकार के व्यापारियों का शुभारंभ स्वर्गीय रोशन लाल गुप्ता के चित्र पर सभागार में उपस्थित सभी बंधुओं ने पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया. ततपश्चात कोरोना के कालचक्र में दिवंगत आत्माओं के प्रति 2 मिनट का मौन रखकर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गयी।

राजीव जैन ने बताया कि आज हरियाणा का व्यापारी केवल अपना मान सम्मान चाहता है और सुरक्षा चाहता है। इसके बदले में वह सरकार को हर प्रकार का सहयोग दे रहा है। टैक्स की अदायगी से लेकर कोरोना आपदा के चलते लॉकडाउन में अपने व्यापारिक प्रतिष्ठानों को बंद कर जनसेवा की भावनाओं में हर प्रकार के सहयोग को देखकर बढ़ चढ़कर भाग लिया। इस अवसर पर व्यापारी कल्याण बोर्ड के चेयरमैन रामनिवास गर्ग ने कहा आज हरियाणा सरकार व्यापारियों के मान सम्मान को बहाल करने व भ्रष्ट अधिकारियों पर लगाम लगाने के लिए कटिबद्ध है।

सरकार व्यापारियों के हर दुख और तकलीफ से भली भांति परिचित है। जिनके निवारण के लिए शीघ्र ही जिला स्तर पर व्यापारी कल्याण बोर्ड की समितियों का गठन किया जायेगा। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही व्यापारियों की बीमा योजना को भी व्यापारी कल्याण बोर्ड पुणे आरंभ करने जा रहा है। उन्होंने सभागार में उपस्थित सभी व्यापारियों को आह्वान किया कि वह अपने अपने क्षेत्र की व्यापारिक समस्याओं को लिखकर भेजें उसका निवारण कराना उनका दायित्व रहेगा।

प्रदेशभर से 20 जिलों के जिलाध्यक्ष के द्वारा मंच के माध्यम से एक प्रस्ताव रखा जिसमें हरियाणा व्यापार मंडल के कार्यकारी अध्यक्ष को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए। इस प्रस्ताव का मंच पर बैठे सभी सम्मानित अतिथियों और सभागार में उपस्थित विभिन्न जिलों के आए हुए पदाधिकारी एवं व्यापारी बंधुओं ने अपने दोनों हाथ उठाकर समर्थन किया। कार्यकारी अध्यक्ष विजय लक्ष्मी चंद गुप्ता को प्रदेश का नवनियुक्त अध्यक्ष घोषित किया गया। हरियाणा व्यापार मंडल के उन वरिष्ठ पदाधिकारियों को जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन व्यापार मंडल के योगदान के लिए दिया ,माला पगड़ी और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। जिनमें रामप्रकाश सेठी ,रतन लाल बंसल, रत्नेश बंसल ,रामसिंह पुच्छल, वीके जैन, महेश भाटिया, कृष्ण लाल तनेजा,बजरंग लाल अग्रवाल, डॉ वेद नाथ, अरुण अग्रवाल, रोशन लाल गुप्ता के सुपुत्र जतिन गुप्ता व अन्य कई व्यापारी शामिल रहे।

प्रदेश अध्यक्ष बनने पर विजय लक्ष्मी चंद गुप्ता ने सभी का धन्यवाद किया एवं बताया इस नई जिम्मेदारी के लिए मुझे पदभार दिया मैं पूर्ण रुप से सभी का आभार प्रकट करता हूं और आश्वस्त करता हूं कि स्वर्गीय लक्ष्मी चंद प्रकार के व्यापारियों गुप्ता एवं स्वर्गीय रोशन गुप्ता के पद चिन्हों पर चलते हुए उनके सपनों को साकार करते हुए व्यापारी समस्याओं को हल कराने के लिए सरकार व्यापारियों के बीच एक सेतु का काम करूंगा।

उन्होंने व्यापारियों को उत्पीड़ित करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों को भी अपनी कड़ी भाषा में सचेत करते हुए कहा कि यदि अधिकारियों ने अपने व्यवहार को नहीं बदला तो उन भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ हरियाणा व्यापार मंडल विरोध का बिगुल बजायेगा। विजय गुप्ता ने सरकार से कोरोना आपदा के चलते मध्यम कार्य के व्यापारियों के लिए एक आर्थिक पैकेज की मांग भी की। इस पैकेज में बिजली के बिल माफ करना, सरकारी दुकानों में किराए में छूट, सस्ती दरों पर ऋण की व्यवस्था करना तथा कोरोना के चलते मृत्यु होने पर व्यापारी एवं आम जनमानस को सरकार के द्वारा 25 लाख ,10 लाख व 5 लाख का मुआवजा देने की अपील की। टैक्स अदायगी करने वाले व्यापारियों को टैक्स कलेक्टर का दर्जा देने की अपील की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथियों एवं विशिष्ट अतिथियों को पानीपत व्यापार मंडल के सभी पदाधिकारी ने मिलकर स्मृति चिन्ह भेंट किया एवं शॉल उड़ाकर उनको सम्मानित किया।

आज के कार्यक्रम में सांसद संजय भाटिया के पुत्र चांद भाटिया, भाजपा जिला अध्यक्ष अर्चना गुप्ता, गजेंद्र सलूजा, प्रांत प्रचारक आरएसएस राजेश गोयल, संजय अग्रवाल, मोहनलाल गर्ग, सुरेश काबरा, विवेक कत्याल , राकेश चुघ ,शिव कुमार मित्तल, सुरेश गुप्ता, जगदीश अग्रवाल, श्री भगवान अग्रवाल, बजरंग जी नारनौल से, रतन लाल जी अटेली से, रतन लाल जी सिरसा से ,मक्खन लाल जी सिरसा से , राम जुनेजा जी फरीदाबाद, नीरज मिगलानी ओल्ड फरीदाबाद, राजीव गुप्ता टोहाना, विनोद जैन गोहाना, बलराम गुप्ता दादरी, वैद्यनाथ राणा इसराना ,नरेश जी सिरसा ,पवन तायल रोहतक ,रविंद्र दादरी से, संजय सिंगला पानीपत, भानु प्रकाश शर्मा भिवानी ,असंध से जगदीश जी ,सभी देव शैलेश जी सफीदों से विमलेश करनाल से कृष्ण लाल तनेजा महेश भाटिया हैप्पी जी डिस्ट्रीब्यूटर स्वर्ण टोली विशेष रूप से मौजूद रहे।

प्रकार के व्यापारियों

शिल्पियों एवं व्यापारियों का संगठन

याज्ञवल्क्य के अनुसार विभिन्न वृत्तियाँ बनाकर एक ही नगर अथवा ग्राम में निवास करने वाले विभिन्न जाति के लोगों का वर्ग ''पूग'' था। इस प्रकार ""श्रेणि'' अथवा ""पूग'' संस्थायें जाति- पाति और ऊँच- नीच के बंधन से मुक्त होकर एक ही ग्राम अथवा नगर में निवास करती थी तथा अपने हितों की सुरक्षा स्वयं करती थी। रमेशचंद्र मजूमदार के अनुसार श्रेणि समाज के भिन्न जाति के परंतु समान व्यापार और उद्योग अपनाने वाले लोगों का संगठन है।

उद्योग और वाणिज्य से संबंधित लोगों का एक अन्य संगठन निगम था। श्रेणि और निगम में क्या अंतर था, इसका कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं प्राप्त होता। परमेश्वरी लाल गुप्त का अनुमान है कि, ""निगम किसी एक व्यवसाय के लोगों का संघटन न होकर अनेक व्यवसायों के समूह का संघटन प्रकार के व्यापारियों था।'' इसमें मुख्य रुप से तीन वर्गों के लोग सम्मिलित थे। उद्योग का काम करने वालों का पहला वर्ग निगम था, जो ""कुलिक'' कहे जाते थे। दूसरा निगम देश- विदेश से माल लाने वाले ""सार्थवाह'' लोगों का था और तीसरा निगम ""श्रेष्ठि'' लोगों का था, जो संभवतः एक स्थान पर अपनी दुकान खोलकर स्थानीय आवश्यकताओं की पूर्ति करते थे। श्रेष्ठि, सार्थवाह और कुलिक तीनों ने सम्मिलित रुप से ""श्रेष्ठि- साथवाह- कुलिक निगम'' की स्थापना की थी। जिस प्रकार शिल्पी श्रेणी में संगठित होकर अपने संबंधित विषयों पर कानून बनाते थे और शिल्प को नियंत्रित करते थे, उसी प्रकार निगम में संगठित व्यापारी अपने व्यापार के संबंध में व्यवस्था करते थे।

ये संगठन क्रय- विक्रय, माल में मिलावट तथा नाप- तौल में अव्यवस्था पर नियंत्रण रखते थे तथा आवश्यता पड़ने पर दंड व्यवस्था का भी प्रावधान था। जम्बूद्वीप प्रज्ञप्ति में इस काल की १८ श्रेणियों का उल्लेख मिलता है --

१. कुम्हार,
२. रेशम बुनने वाला,
३. सोनार (सुवर्णकार),
४. रसोइया (सूवकार),
५. गायक (गन्धब्ब),
६. नाई (कासवग),
७. मालाकार,
८. कच्छकार (काछी),
९. तमोली,
१०. मोची (चम्मपरु),
११. तेली (जन्तपीलग),
१२. अंगोछे बेचने वाले (गंछी),
१३. कपड़ा छापने वाले (छिम्प),
१४. ठठेरे (केंसकार),
१५. दर्जी (सीवग),
१६. ग्वाले (गुआर),
१७. शिकारी (भिल्ल) तथा
१८. मछुये।

श्रेणियों का संवैधानिक रुप

श्रेणियों का लोकतांत्रिक आधार पर विकास हुआ तथा धीरे- धीरे उनका अपना संविधान निर्मित हुआ, जिसके आधार पर वे अपना कार्य करते थे। बौद्ध साहित्य में कहा गया है कि श्रेणि संगठनों का प्रमुख सेट्ठि (श्रेष्ठि) अपने समुदाय और राज्य के लिए अनेक कार्य करता था। बृहस्पति स्मृति से पता चलता है कि श्रेणि संगठन की एक प्रबंधकारी समिति होती थी, जिसकी सहायता के लिए दो- तीन या पाँच सदस्य होते थे। उस समिति का एक प्रधान या अध्यक्ष होता था। नारद स्मृति में ही कहा गया है कि,""राजा को चाहिए कि वह श्रेणियों तथा अन्य नियमों की प्रथाओं को मान्यता दे, उनके जो भी कानून (धार्मिक कर्तव्य), उपस्थिति के नियम और जीवन- निर्वाह के विशेष परिपाटी हो, उन सबको राजा स्वीकार करे।'' संगठन के सदस्यों में फूट
डालने वाले को दण्ड देने की व्यवस्था की गयी थी। यद्यपि श्रेणि संगठनों को अपने कार्यों में पर्याप्त स्वतंत्रता थी, किंतु उनमें आपस में मतभेद होने पर राजा को हस्तक्षेप करने तथा उन्हें अपने धर्म में स्थापित करने का अधिकार प्राप्त था। नारद के अनुसार मुख्यों और समूहों के बीच विवाद उत्पन्न हो, तो राजा ऐसे प्रश्नों को निबटारा श्रेणियों के विशिष्ट नियमों के अनुसार करता था।

मालवा की श्रेणियों ने अपनी व्यावसायिक व्यवस्था के साथ- साथ अन्य सार्वजनिक कार्य में भी योगदान दिया। मंदसोर प्रस्तर अभिलेख के अनुसार, तंतुवाय श्रेणी दशपुर में फूली- फली और ई. सन. ४३६ ई. में उनसे अपनी संचित धनराशि से सूर्य का एक विशाल मंदिर बनवाया। कुछ समय बद मंदिर का एक भाग जीर्ण- शीर्ण हो गया, जिसकी मरम्मत उसी श्रेणी में ४७२ ई. में करवायी।

मंदसौर प्रस्तर अभिलेख में पट्टवायों की श्रेणी के सदस्यों को विविध विषयों का ज्ञाता कहा गया है। उसी अभिलेख में उनके सैन्यकर्म का भी उल्लेख मिलता है। अतः परमेश्वरी लाल गुप्त की धारणा है कि ,""श्रेणियाँ अपने में से कुछ लोगों को सैनिक शिक्षा भी देती थीं, जो अपने समाज के सदस्यों के धन, जन और वणिज की रक्षा करते थे। संभवतः इस प्रकार के लोग सार्थ के रक्षार्थ साथ जाते रहे होंगे।

व्यापारियों ने बताया अनाज के ई ट्रेडिंग को गलत, सरकार के फैसले पर जताया विरोध

व्यापारियों ने बताया अनाज के ई ट्रेडिंग को गलत, सरकार के फैसले पर जताया विरोध

अनाज की ई-ट्रेडिंग (e-trading) को लेकर व्यापारियों के भीतर भारी गुस्सा है। इसको लेकर हरियाणा में बहुत सारे अनाज व्यापारी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि व्यापारियों को जबदस्ती परेशान करने के लिए सरकार ने ये आदेश जारी किया है, जो बिलकुल गलत है।

व्यापारियों ने बताया कि इस धंधे में बहुत सारी समस्याएं हैं और मुनाफा दिनों दिन कम होता जा रहा है। ऐसे में सरकार व्यापारियों की सहायता न करके उनको तंग करने के लिए नए नए फरमान लेकर आ रही है, जो व्यापारियों के साथ-साथ किसानों के लिए भी अच्छा नहीं है। व्यापारियों ने बताया कि ई ट्रेडिंग के पहले, सरकार को किसानों के अनाज की खुली में बोली सुनिश्चित करनी चाहिए। जब खुली बोली के दामों से किसान संतुष्ट न हो तब ही फसल की ई ट्रेडिंग की स्वीकृति देनी चाहिए। इसके साथ ही व्यापारियों ने कहा कि सरकार को मंडी गेट पास (mandi gate-pass) बनवाने में भी छूट देना चाहिए और फसल की खरीद पर आढ़तियों को मिलने वाली पूरी 2.5 प्रतिशत आढ़त भी सुनिश्चित करनी चाहिए।

इनके अलावा भी व्यापारियों की सरकार से अन्य शिकायतें हैं। व्यापारियों ने बताया कि पहले धान पर मार्केट फीस व एचआरडीएफ दोनों मिलाकर मात्र 1 प्रतिशत लगता था, लेकिन अब सरकार की तरफ से इसको बढ़ाकर 4 प्रतिशत कर दिया गया है। इसे फिर से घटाकर 1 प्रतिशत किया जाना चाहिए। इसके साथ ही तुली हुई फसलों का उठान भी समय से नहीं होता जो कि गलत हैगेहूं और धान का उठान सरकार को निर्धारित 72 घंटे के समय से पहले ही करवाना चाहिए, क्योंकि अगर उठान में देरी होती है तो उसमें किसी भी प्रकार की हानि हो सकती है। कई बार तो अनाज खुले में पड़ा रहता है और बरसात के कारण भीग जाता है। इसके साथ ही सरकार को तय समय 72 घंटे के भीतर ही किसानों का भुगतान कर देना चाहिए, जो सरकार फिलहाल नहीं करती है।

एक व्यापारी ने बताया कि सरकार गेहूं और धान की खरीदी में आढ़तियों का कमीशन और पल्लेदारों की पल्लेदारी देने में एक साल तक समय लगा देती है जो सरासर गलत है। क्योंकि जब कभी सरकार को व्यापारियों से पैसे मिलने होते हैं तो देरी के एवज में सरकार व्यापारियों के ऊपर पैनल्टी लगाती है और कभी कभार तो ब्याज भी लेती है। लेकिन यदि सरकार व्यापारियों, किसानों और मजदूरों के भुगतान में देरी करती है तो किसी भी प्रकार की क्षतिपूर्ति नहीं करती। ये सरासर गलत है।

व्यापारियों ने ई ट्रेडिंग को बेहद कमजोर व्यवस्था बताते हुए कहा कि, यह बेहद चिंता का विषय है कि सरकार इसकी खामियों पर ध्यान नहीं दे रही है। ई-ट्रेडिंग के माध्यम से किसान की फसल की बिक्री होने पर, फसल का भुगतान किस प्रकार से किया जाएगा यह सरकार ने स्पष्ट नहीं किया है। क्योंकि सरकार किसानों से फसल ख़रीदने पर कई महीनों तक भुगतान नहीं करती। जबकि इसके लिए उन्होंने कानून बना रखा है कि सरकार फसल खरीदने के 72 घंटे के भीतर भुगतान कर देगी। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। इसके साथ ई-ट्रेडिंग के माध्यम से फसल की बिक्री होने पर प्रकार के व्यापारियों फसल का उठाव कैसे किया जाएगा, इसको लेकर भी सरकार ने कोई ठोस रूप रेखा तैयार नहीं की है।

व्यापारियों ने फसलों की ई ट्रेडिंग को किसानों को बर्बाद करने की साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि अगर फसलों का व्यापार ई ट्रेडिंग के माध्यम से होने लगा तो फसलों के सारे व्यापार पर नियंत्रण देश के अमीर उद्योगपतियों का हो जाएगा। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार यही चाहती है कि देश में उपलब्ध अनाज पर बड़े उद्योग घरानों का कब्जा हो जाए। जिससे ये बड़े उद्योगपति अनाज के दामों का रिमोट कंट्रोल अपने हाथ में रख पाएं। ये जब चाहेंगे तब बाजार में अनाज की सप्प्लाई बढ़ाकर या कम करके अनाज के भावों को ऊपर नीचे कर सकते हैं। अनाज खरीदी में एकाधिकार आ जाने से ये किसानों को उनका अनाज कम दामों में बेंचने पर भी मजबूर कर सकते हैं।

व्यापारियों ने कहा कि यदि अनाज का कंट्रोल उद्योगपतियों के हाथ में आ गया तो आटा, बेसन, दालों जैसी मूलभूत चीजों के दाम आसमान छूने लगेंगे। ये चीजें फिलहाल इतने ज्यादा ऊंचे दामों पर नहीं बिकती हैं क्योंकि इन चीजों को अभी ज्यादातर बाजार में खुला ही बेचा जाता है।

व्यापारियों ने कहा कि सरकार किसानों को बर्बाद करने की कई साजिशें रचती रहती है, इसके तहत सरकार किसानों के लिए कई काले कानून प्रकार के व्यापारियों लेकर आई थी, जिसे भारी विरोध के बाद वापस लेना पड़ा।

ई-ट्रेडिंग के नाम पर आढ़तियों और किसानों को तंग किया जा रहा है। यदि किसान अपनी फसल प्रकार के व्यापारियों पहले की तरह में मंडी में आढ़तियों को बेचेंगे तो किसानों को फसल के दाम ज्यादा मिल सकते हैं, क्योंकि मंडी में किसानों के अनाज की खुली बोली कई आढ़तियों के बीच लगाई जाती है, जहां कम्पटीशन बना रहता है और वहां पर किसान अपनी फसल को ऊंचे दामों में बेंचकर ज्यादा मुनाफा कमा सकता प्रकार के व्यापारियों है।

मंडी टैक्स में वृद्धि के विरोध में व्यापारियों ने धान की खरीदी-बिक्री की बंद

मंडी टैक्स में वृद्धि के विरोध में व्यापारियों ने धान की खरीदी-बिक्री की बंद

भाटापारा। राज्य शासन के द्वारा मंडी टैक्स में वृद्धि किए जाने के विरोध में सोमवार से व्यापारियों ने हड़ताल प्रारंभ कर दी है। जिसके फलस्वरूप भाटापारा कृषि उपज मंडी बंद हो गई है। टैक्स बढऩे से व्यापारी वर्ग परेशान हैं। इधर, 2 दिन से मंडी बंद होने के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए भटकना पड़ रहा है। वहीं, रोज कमाने रोज खाने वाले रेजा, कुली हमाल आदि लोगों को अपनी जीविकोपार्जन की चिंता सता रही है। हड़ताल से मंडी क्षेत्र में सन्नाटा पसरा हुआ है। प्रदेश सरकार के द्वारा मंडी टैक्स में लगभग ढाई गुना वृद्धि कर दिए जाने से व्यापारियों ने मंडी में खरीदी का लगभग बहिष्कार कर दिया है। व्यापारी लगातार टैक्स कम किए जाने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए व्यापारियों का सरकार स्तर पर भी प्रयास जारी है।

पोहा, राइस व दाल मिल बंद
भाटापारा कृषि उपज मंडी से जुड़ा भाटापारा में तीन व्यवसाय प्रमुख है। जिसमें पोहा मिल, राइस मिल व दाल मिल शामिल हैं। ये तीनों व्यवसाय इन दिनों बंद हैं। राइस मिल में कस्टम मिलिंग का कार्य होना है, इसलिए राइस मिल वाले कस्टम मिलिंग की प्रक्रिया में व्यस्त है। वहीं, पोहा मिल जो पूरी तरीके से कृषि उपज मंडी के माध्यम से धान खरीदी से चलती है अभी वर्तमान में बंद है और इसी प्रकार दाल मिल भी बंद है। क्योंकि इसमें भी सरकार ने टैक्स वृद्धि कर दी है। इस प्रकार अभी तीनों व्यवसायी वर्ग हड़ताल पर हैं। भाटापारा कृषि उपज मंडी में राइस दाल व पोहा मिल के लगभग 400 व्यापारी पहुंचते हैं, जो कृषि उपज जींस की खरीदी- बिक्री करते हैं। टैक्स वृद्धि के विरोध में व्यापारियों के हड़ताल पर चले जाने से सबसे ज्यादा प्रभाव रेजा कुली व हमाल जैसे लोगों के ऊपर पड़ा है।

इस प्रकार हैं टैक्स की नई दरें
राज्य शासन ने व्यापारियों द्वारा खरीदे जा रहे धान में प्रति सैकड़ा तीन रुपए, मंडी शुल्क 2 रुपए, कृषक कल्याण शुल्क व 20 पैसे निराश्रित शुल्क निर्धारित किया है इसी तरह उन्हारी की उपज में एक रुपए मंडी शुल्क, 50 पैसा कृषक कल्याण शुल्क व 20 पैसा निराश्रित शुल्क की दर निर्धारित की है।

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कृषि उपज मंडी का शासकीय काम चालू है। खरीदी- बिक्री व्यापारियों ने बंद कर रखी है। मंडी में खरीदी-बिक्री प्रारंभ हो, इसके लिए व्यापारियों से लगातार बातचीत की जा रही है और मंडी प्रारंभ हो इसका प्रयास किया जा रहा है।
- सुरेश कुमार चौरे, सचिव कृषि उपज मंडी समिति, भाटापारा

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